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अगस्त, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लेमन ग्रास- चाय (सुगंधित)

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    चाय (सुगंधित) सामान्य नाम: चाय, हरी चाय, सुगंधित चाय, देहाती चाय, सुगंधित बेला  संस्कृत के नाम: - सुगंधमुत्रुण, सुगन्धत्रुण      लेमन ग्रास एक सुगंधित जड़ी बूटी है जिसका उपयोग चाय, पेय पदार्थों, हर्बल दवाओं और पूर्वी प्रेरित सूप और अन्य व्यंजनों में किया जाता है। यह घास गुजरात के गॉवो में चाय, हरी चाय, सुगंधित चाय, देहाती चाय और सुगंधित बेला के नाम से जाना जाता है। यह घास घने झुरमुटों में उगती है। पत्ते चमकीले नीले-हरे रंग के होते हैं और कुचलने पर खट्टे गंध को छोड़ देते हैं। सुगंधित पत्तियां वह हिस्सा हैं जो स्वाद के रूप में उपयोग किया जाता है। लेमन ग्रास भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल निवासी है। यह उष्णकटिबंधीय घास के मैदानों में स्वाभाविक रूप से बढ़ता हुआ पाया जाता है। यह उष्णकटिबंधीय एशिया में भी व्यापक रूप से उगाया जाता है।   उपयोग: -     (1) जुकाम होने पर लेमन ग्रास के रस या इसके काढ़े में अदरक का रस और शहद मिलाकर पीने  से राहत मिलती है।  (2) हैजा में उल्टी होने पर लेमन ग्रास के रस में नींबू का रस और थोड़ा...

हलासन(halasana)- चेहरे पर एक युवा चमक प्रदान करता है।

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    यह आसन शरीर को हल की तरह बनाता है।  इसलिए इस आसन को 'हलासन' कहा जाता है। तरीका (1 )  जमीन पर लेट जाएं।  (2 ) हथेलियों को ज़मीन की ओर रखते हुए दोनों हाथों को दोनों ओर लम्बा रखें।  (3 ) दोनों पैरों को जोड़ लें और उन्हें एकदम सीधा रखें।  (4 ) फिर साँस लेते हुए उन्हें बहुत धीरे से उठाएँ।  (5 ) सांस लेने और पैरों को ऊपर उठाने की क्रिया एक साथ की जानी चाहिए।  (6 ) पैर न मोड़ना।  अपने हाथों को ऊंचा न होने दें।  अपनी पीठ भी न झुकाएं।  जब आप पूरी तरह से सीधे हो जाएं तो सांस छोड़ना शुरू करें और साथ ही दोनों पैरों को पीछे की ओर झुकाएं और फिर धीरे-धीरे दोनों पैरों को सिर के पीछे की ओर लाएं।  पैर की उंगलियों को जमीन से छूने तक शरीर के ऊपर झुकें।  (7) घुटनों को सीधा रखें और साथ में, नितंब और पैर एक सीध में हों।  (8 ) आसन पूरा होने तक स्वाभाविक रूप से साँस छोड़ें।  मुंह से सांस न लें।  (9 ) आँखें बंद या खुली रखना।  सुनिश्चित करें कि पैर बिल्कुल झुकें नहीं।  दाढ़ी को गर्दन से चिपकाए रखना आवश्यक है। ...

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण- (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan)

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   शिस्त, क्षमा और करुणा का त्रिवेणी संगम को ही शिक्षक कहा जाता है।   भारत देश एक महान देश है देश में अनेक प्रकार के  नारी और नर ने इस देश के विकास में और इस देश की उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।  ऐसे विश्व वंदनीय युगपुरुष महात्मा विभूति और प्रियदर्शनी ऐसी नारियां इस देश की धरोहर है।  इस देश की भूमि पर और इस देश की धरा पर जन्म लेने वाले लोगों ने इस देश के लिए और देश की उन्नति के लिए और उसके विकास के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया है।  ऐसे अखंड भारत के लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी,  डॉक्टर होमी भाभा,  श्याम जी कृष्ण वर्मा,  लाल बहादुर शास्त्री और स्वामी रामतीर्थ जैसे महान व्यक्तियों की जन्म तिथि और पुण्य तिथि के अवसर पर हम उसे याद करते हैं और इस महान पुरुषों के जीवन के कार्यों को हम जानते हैं और उनके संदेश के अनुरूप और उनके जीवन के सिद्धांतों के अनुरूप और बताए हुए उसके रास्ते पर आगे चलने का और आगे चलकर देश  की सेवा के लिए हम उसमें से प्रेरणा लेते हैं। हम आने वाले नई पीढ़ी के बच्चों को उसके...

सर्वांगासन ( Sarvangasana)- आसन एक लाभ अनेक

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       यह एक महत्वपूर्ण आसन है और अद्भुत लाभ प्रदान करता है। इस आसन को 'सर्व-अंग-आसन' कहा जाता है क्योंकि जब यह आसन किया जाता है तो शरीर के सभी अंग आसन करने में लगे होते हैं।   तरीका    (1) अपनी पीठ के बल लेट जाएं।  (2) फिर दोनों नथुनों से फेफड़े में साँस भरके दोनों पैरों को धीरे से उठाएँ। (3) फिर पैरों, नितंबों और पीठ को एक सीध में उठाएं।  (4) पीठ को दोनों  हाथों से सहारा दें। कोहनियों को जमीन से ऊपर रखें। कंधे और गर्दन को जमीन से छूने दें। ध्यान रखें कि शरीर हिले  नहीं । पैरों को सीधा रखें।  (5) फिर पैर की उंगलियों को स्थिर रखते हुए स्वाभाविक रूप से सांस लेते रहें। (6)  पैर सिर की ओर झुकाए शरीर को आराम दें और जमीन पर लाएं। इस आसन में पूरे शरीर का भार कंधों पर रहता है।  (7) गर्दन का अगला भाग  नीचे पर थायरॉयड ग्रंथि पर ध्यान लगाओ।  (8) यह आसन सुबह और शाम दो बार किया जा सकता है। इस आसन के तुरंत बाद मत्स्यासन करना चाहिए। तो सर्वांगासन के सभी लाभ उपलब्ध हैं। यह आसानी से दो मिनट से शुरू किया जा सकता है ...

74 वें भारतीय स्वतंत्रता दिवस 2020 (Independence Day of India)

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      पंद्रह अगस्त भारत की आजादी का दिन है। यह हमारा राष्ट्रीय त्योहारों है। आजादी का इतिहास      हमारे देश पर 15 अगस्त 1947 तक अंग्रेजों का शासन था।  अंग्रेजों ने हमारे देश को बर्बाद कर दिया था।  लोगों के गृह उद्योग धराशायी हो गए।  परिणामस्वरूप हमारे हजारों कारीगर बेरोजगार हो गए।  अंग्रेजों के जुल्म से भारत के लोग त्रस्त थे।  गांधीजी ने भारत को ब्रिटिश दासता से मुक्त करने के लिए सत्याग्रह संघर्ष शुरू किया।  देश के लोगों ने गांधी जी को अपना पूरा समर्थन दिया।  जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, बालगंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय आदि जैसे नेताओं ने राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया।  भगत सिंह, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आज़ाद और अन्य युवा मुस्कुराते हुए शहीद हो गए।  आखिरकार 15 अगस्त 1947 को हमारा देश भारत स्वतंत्र हो गया।  उस अवसर पर लोग बहुत खुश थे।  तब से, हर साल 15 अगस्त को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। स्वतंत्रता दिवस समारोह      15 अगस्त को सार्वजनि...

कृष्ण जन्मोत्सव (Krishna Janmashtami)

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        श्रावण मास त्योहारों का मास है।  पूरे श्रावण मास को भक्ति के साथ बिताया जाता है लेकिन अगर कोई एक त्योहार है जिसका बेसब्री से इंतजार किया जाता है, तो वह है कृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी।  बड़ा हो या छोटा, हर कोई इस त्योहार का इंतजार करता है ।      भगवान कृष्ण का जन्मदिन यानी जन्माष्टमी हर साल श्रावण के महीने में कृष्ण पक्ष के आठवें दिन मनाया जाता है।  इस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था इसलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है।  हमारे शास्त्रों और पुराणों में भगवान कृष्ण के जन्म का सुंदर वर्णन है।        हिंदू धर्म में जन्माष्टमी बहुत हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाई जाती है।  लोग इस विशेष त्योहार की तैयारी में कई दिन पहले से ही लग जाते हैं।         गॉव और शहर में दही हांड़ी का कार्यक्रम रखा जाता है।  छोटे बच्चे को भगवन श्री कृष्ण और उसके भाई बलराम बनाकर दही हांड़ी तोड़ने का कार्यक्रम किया जाता है। सभी लोग उसमे पूरी भक्ति भाव के साथ जुड़ते है। धुन, भजन,रास और संगीत के ...

बहन की राखी

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       हमारे देश में वर्ष में अनेक प्रकार के त्यौहार आते हैं जिसमें अलग-अलग प्रकार के जाति धर्म के अलग-अलग त्यौहार होते हैं और उसमें भी खास करके विक्रम संवत के वर्ष में दो ऐसे त्यौहार हैं जिसका हमारी भारतीय संस्कृति के साथ पवित्र नाता है और वह हमारी भारतीय संस्कृति के पवित्र निर्मल और निस्वार्थ प्रेम के प्रतीक हैं और वह है रक्षाबंधन और भाई बीज का त्यौहार हमारा समाज कई ऐसे अटूट संबंधों से बंधा हुआ है। जिसके अनेक संबंध है और वह है माता पिता, पति पत्नी ,भाई बहन। रक्षाबंधन का त्यौहार भाई और बहन के पवित्र और निर्मल प्रेम का प्रतीक माना जाता है। रक्षाबंधन का त्यौहार नारी सम्मान का त्योहार है हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है वहां ईश्वर का निवास होता है और वही ईश्वर खुश होते हैं और जहां नारी का सम्मान नहीं होता वहां सर्व कार्य असफल होते है|           रक्षाबंधन का त्यौहार  सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है वैसे भी सावन का महीना वर्षा ऋतु का महीना होता है और सबसे ज्यादा त्योहार उसी महीने म...