डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण- (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan)
शिस्त, क्षमा और करुणा का त्रिवेणी संगम को ही शिक्षक कहा जाता है।
भारत देश एक महान देश है देश में अनेक प्रकार के नारी और नर ने इस देश के विकास में और इस देश की उन्नति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे विश्व वंदनीय युगपुरुष महात्मा विभूति और प्रियदर्शनी ऐसी नारियां इस देश की धरोहर है। इस देश की भूमि पर और इस देश की धरा पर जन्म लेने वाले लोगों ने इस देश के लिए और देश की उन्नति के लिए और उसके विकास के लिए अपने प्राणों को न्योछावर किया है। ऐसे अखंड भारत के लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी, डॉक्टर होमी भाभा, श्याम जी कृष्ण वर्मा, लाल बहादुर शास्त्री और स्वामी रामतीर्थ जैसे महान व्यक्तियों की जन्म तिथि और पुण्य तिथि के अवसर पर हम उसे याद करते हैं और इस महान पुरुषों के जीवन के कार्यों को हम जानते हैं और उनके संदेश के अनुरूप और उनके जीवन के सिद्धांतों के अनुरूप और बताए हुए उसके रास्ते पर आगे चलने का और आगे चलकर देश की सेवा के लिए हम उसमें से प्रेरणा लेते हैं। हम आने वाले नई पीढ़ी के बच्चों को उसके प्रसंगों से और उसके जीवन के कर्म से उसे आगाज करके उसके अनुभव को अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न करने के लिए हम कहते , ऐसा ही एक व्यक्तित्व है, एक प्रतिभा है जिसका नाम है डॉ सर्वपल्ली राधा कृष्ण।
- जन्म और कार्य
डॉक्टर राधाकृष्ण का जन्म 5 सितंबर 1888 में हुआ था। सर्वपल्ली अपने बापदादा ओं का गांव है और राधा कृष्ण नाम अपनी बुआ ने रखा था। दक्षिण भारत में एक प्रथा है कि अपने नाम से पहले अपने गांव का नाम लिखा जाता है इसलिए सर्वपल्ली राधा कृष्णा नाम रखा गया। डॉक्टर राधाकृष्ण को मात्र 21 साल की उम्र में ही प्रेसिडेंसी कॉलेज में शिक्षक के तौर पर नौकरी मिल गई थी और उसने शिक्षक की परिभाषा ही बदल दी उसने प्राध्यापक के रूप में अपनी भाषा विषय का ज्ञान शब्द की पसंदगी मैं इतना आकर्षण था और अपना जादू ऐसा चला की वर्ग में बच्चे बड़े ध्यान से पढ़ते थे।
- शिक्षक का अर्थ और महत्व
डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपने पुराणों में दिए गए शिक्षक की व्याख्या के अनुसार उसकी परिभाषा के अनुसार अपने जीवन काल में शिक्षण का कार्य किया और समाज को शिक्षित करने का अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। हमारे ऋग्वेद में कहा गया है शिक्षक के बारे में शिक्षक कौन है तो कहा जाता है कि वह एक ज्ञानवान गुणवान शिक्षक समाज को प्रेरित करता है शिक्षक जन गण और मन को और सामान्य सामाजिक प्राणी में से योग्य और विशिष्ट मनुष्य बनाने का कार्य और अपनी अलग पहचान वह कार्य शिक्षक का कार्य है और शिक्षक का कार्य और उसी कार्य है जो ज्ञान रूपी गंगा को बहती करके समाज को गतिशील रखता है। एलेग्जेंडर ने कहा है कि मेरा जन्म मेरे माता पिता को आभारी हैं किंतु मेरा जीवन मेरे शिक्षक का ही आभारी है। शिक्षक और विद्यार्थी के बीच का स्नेह संबंध ही शिक्षा का सर्वोत्तम साधन है। विद्यार्थी के जीवन सर्जन में वाली और विद्यार्थी के बीच में जोड़ने वाले सुंदर कड़ी हैं वह शिक्षक को यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है। ऐसा कहा जाता है के जन्म से प्रत्येक शिशु शुद्ध आत्मा के रूप में जन्म लेता है , मगर उस पर आधुनिक जीवन शैली के रूप में लगने वाले जो धूल है उसको दूर करने का कार्य शिक्षक करता है। हमारे देश के महान व्यक्ति चाणक्य के अनुसार शिक्षक कभी साधारण नहीं होता निर्माण और प्रलय उनकी गोद में पलते हैं यह बात सही है क्योंकि शिक्षक की असफलता पर समग्र राष्ट्र पर बड़ा असर पड़ता है। शिक्षक ही समाज में परिवर्तन के वाहक बनते हैं। क्रांति की मशाल जलाते हैं और राष्ट्र का सुकान अपने हाथ में लिए वह देश और समाज को आगे ले जा सकते हैं। हमारे समाज में अलग-अलग प्रकार के व्यवसाय पर एक नजर डालें तो कहा जाता है कि डॉक्टर की असफलता पर, इंजीनियर की असफलता पर और वकील की असफलता पर समाज में कोई बड़ा असर नहीं पड़ता या नुकसान नहीं होता मगर शिक्षक की असफलता पर आने वाली पीढ़ी कमजोर बनती हैं, इसीलिए शिक्षक एक अलग प्रकार का व्यक्तित्व होना चाहिए और इसीलिए कबीरदास ने भी कहा है कि जो शिक्षक होता है वह कुम्हार की तरह होते हैं और वह जिस प्रकार से कुम्हार अपने कर्म से कुंभ को नया आकार देता है, नया सर्जन करता है उसी प्रकार शिक्षा विद्यार्थी को भविष्य में आने वाले एक आदर्श नागरिक के रूप में उसका स्वरूप तैयार करता है। और समाज में शिक्षक को गुरु का स्थान दिया गया है , इसलिए विद्यार्थी जितना सम्मान अपने शिक्षक को देता है अपने गुरु को देता है उतना सम्मान अपने माता-पिता को भी नहीं देता, यह शिक्षक के लिए एक आदर्श व्यक्तित्व रखता है।
शिक्षक में शैक्षणिक क्षमता होनी चाहिए साथ साथ जीवन के प्रति आदर्श अभिगम होना चाहिए क्योंकि विद्यार्थी जो होता है वह पुस्तक से नहीं शिक्षक के जीवन में से सीखता है। शिक्षक का अर्थ है शि अर्थात शिस्त क्ष अर्थात क्षमा और क अर्थात करुणा। शिस्त, क्षमा और करुणा का त्रिवेणी संगम को ही शिक्षक कहा जाता है।
हमारे समाज को और हमारे देश को सच्चे और श्रेष्ठ शिक्षक मिले ऐसी मनोकामना के साथ डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्ण के पावन चरणों में मेरा कोटि कोटि वंदन।


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