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धनुरासन- पेट की चर्बी कम करता है।

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       इस आसन को पेट के बल लेटकर करना है। इस आसन को धनुरासन कहा जाता है क्योंकि इसमें  शरीर का आकार एक खींचे गए धनुष जैसा दिखता है।        उल्टा होकर सोएं, दोनों हाथों को शरीर के करीब लेकर, हाथों को जमीन से सटाकर, घुटनों से सीधे पैर।  तरीका (1) दोनों पैरों की एड़ी को नितंबों तक ले आएं।  (2) दोनों हाथों से दोनों पैरों को एड़ियों को सामने पकड़ें।  (3) हाथ से पकड़े हुए पैर को बिल्कुल खींचो। शरीर का वजन नाभि क्षेत्र पर रहता है। धड़ को ऊपर उठाएं, सिर को जितना पीछे ले जा सकते हैं पीछे खींचें। ऊपर की ओर दृष्टि।  (4) कुछ देर इस स्थिति में रहने के बाद मूल स्थिति में वापस आना। (5) खिंचाव छोड़ें और दोनों पैरों को दोनों हाथों से ही पकड़ें। (6) दोनों हाथों को शरीर के बगल में रखें।  (7) दाहिने पैर को घुटने से सीधा करके जमीन पर रखें।  (8) बाएं पैर को घुटने से जमीन तक सीधा रखें। ध्यान रखने योग्य बातें  (1) हर्निया, अल्सर, प्रोस्टेट, हृदय की समस्या या उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।   (2) ...

विश्व वंदनीय युगपुरुष महात्मा गांधी

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         अक्टूबर मास में विश्व वंदनीय युगपुरुष महात्मा गांधी और अखंड भारत के शिल्पी लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान विभूति और  श्यामजी कृष्ण वर्मा , लाल बहादुर शास्त्री जैसे महान व्यक्तियों की जन्म तिथि और पूर्ण तिथि के शुभ अवसर पर हम उन महान पुरुषों के जीवन कार्यों को याद करते हैं और उनके संदेश के अनुसार,  उनके सिद्धांतों के अनुसार हमारे जीवन में आगे चलने का और देश की सेवा करने के लिए और हमारे दिल में राष्ट्र भावना जगाने के लिए अपना  प्रयत्न करते हैं। ' दे दी हमें आजादी बिना खडक बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल ' यह जो पंक्ति है कमाल की है क्योंकि हमारे देश में ऐसे वीर पुरुष,  ऐसे विश्व वंदनीय महान लोगों का जन्म हुआ है,  जिसको  याद हम हंमेशा करते हैं। उसके  सिद्धांत को  याद करते हैं।  गांधीजी के सिद्धांतों में सत्य, अहिंसा,  ब्रह्मचर्य,  सादगी और विश्वास था।  इसीलिए उसको याद करके हम और अक्टूबर महीने में उसके जन्म तिथि के अवसर पर उसे याद करके उसके सिद्धांतों को अनुसार कार्य करने का प्र...

लोलासन- बाजुओं की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।

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       यह आसन बैठकर किया जाता है। जब शरीर इस आसन की पूर्ण स्थिति में होता है, तो यह एक घड़ी के पेंडुलम की तरह बहता है। इसलिए इसे लोलासन कहा जाता है। चूँकि इस आसन में पद्मासन करना है और हाथों की मदद से शरीर को ऊपर उठाना है, इसलिए इसे उत्थित पद्मासन भी कहा जाता है।   मूल स्थिति (1) पहले दोनों पैरों को सीधा करके बैठें।   (2) हाथ को जांघ  के किनारे रखें।   (3) रीढ़ को थोड़ा सीधा करें। तरीका  (१) पहले पद्मासन में बैठें। दोनों हाथों को जांघ  के बाहर की तरफ रखें। हथेलियों को जमीन पर और उंगलियों की दिशा को व्यवस्थित करें।   (२) सामान्य श्वास में, दोनों हाथों के बल से शरीर को जहाँ तक संभव हो ले जाएँ। कुछ देर इस स्थिति में रहें।   (३) धीरे-धीरे शरीर को वापस नीचे लाएं और मूल स्थिति में लौट आएं।   ध्यान रखने योग्य बातें   (१) आसन की पूर्ण स्थिति में गर्दन और आँखों को सीधा रखें।   लाभ   (१) बाजुओं , छाती आदि पूर्ण विकसित होते हैं। बाजुओं की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।  (२) आलस्य और लापर...

पश्चिमोत्तानासन-pachimottanasana

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        इस आसन को 'उग्रासन' भी कहा जाता है। उग्र शब्द का अर्थ है 'शिव'। भगवान शिव को संहारक माना जाता है। इसलिए उन्हें उग्र या भयानक के रूप में जाना जाता है। इस आसन को 'उग्रसना' के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह बहुत कठिन है। तरीका (1) जमीन पर बैठें और पैरों को छड़ी की तरह लंबा करें।  (2) पैर की अंगुलियों के साथ-साथ पहली और मध्यमा उंगली को पकड़ें। पैरों को पकड़ते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं। (3) साँस छोड़ते हुए और धीरे-धीरे सिर को नीचे की ओर झुकाए क्योंकि यह घुटनों को छूता है , नीचे मोड़ते समय पेट को अंदर की ओर खींचे, ताकि आसानी से झुक सके। (4) मुड़ते समय सिर को दोनों हाथों के बीच मोड़ें। लोचदार रीढ़ वाले युवा पहले प्रयास में सिर और घुटनों को स्पर्श करने में सक्षम होंगे। मोटे लोगों के लिए कठिन समय होगा। जिसकी करोड़ भंगुर हो गई हो उस व्यक्ति को इस आसन  करने में 15 से 30 दिन  का समय लग जाता है।   (5) लगभग पाँच सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें। इस आसन को धीरे-धीरे 30 सेकंड से शुरू करके दस मिनट तक किया जा सकता है।  लाभ (1) यह बहुत ...

कांटीसेंबल(Kaanti-senbal) - एक चमत्कारी औषध

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लोकप्रिय नाम:-   कांटीसेंबल kaantisenbal, रक्त सेंबल rakta senbal, सेमल semal, सेमर कंद semar kanda, सेमुल semul, सेमुर semur, शेंबल shembal, शिंबल shimbal, सिमल simal, सिमुल simul   Gujarati :  શીમળો shimalo  संस्कृत के नाम : - शाल्मली, तूलीनि, रक्तापुष्प      कांटीसेंबल में लोहे के  जैसे  कांटे, लाल रंग के फूल और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं। इसकी छाल से चिपचिपा सैप एक लाल गम बनाता है जिसे मोयरस कहते हैं। सिंधव और घी में कांटीसेंबल फूल की सब्जी खाने से कठिन कोढ़, कोढ़ और कफ नष्ट हो जाता है। उपयोग: - (1) कांटीसेंबल की सूखी जड़ को शेमुर मुसली कहा जाता है। आधा चम्मच इस मुसली पाउडर, एक चम्मच चीनी और एक चम्मच गाय के घी को एक गिलास दूध में गर्म करें और हर रात पीने से शीघ्रपतन ठीक हो जाता है।       जो लोग यौन कमजोरी का सामना कर रहे हैं, उन्हें कांटीसेंबल की जड़ों से मोचरस का पेस्ट बनाना चाहिए और इसे सुबह-शाम 5-10 ग्राम चीनी के साथ लेना चाहिए। (2) एक चम्मच कांटीसेंबल की छाल का काढ़ा सुबह-शाम पीने से दस्त, कब्ज  ठी...

वृक्षासन(Vrikshasana)

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     इस आसन को 'वृक्षासन' कहा जाता है क्योंकि इसमें पेड़ जैसी आकृति होती है।       तरीका (1) किसी भी एक पैर पर खड़े हो जाओ। यदि एक पैर में संतुलन बनाए रखने में कठिनाई होती है, तो दीवार का सहारा लिया जा सकता है।  (2) दूसरे पैर को घुटने से एड़ी से पहले पैर की जांघ के आधार के ऊपर रखें जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।  (3)दोनों हाथों को बाजू से सीधा करते हुए, हथेलियों को एक-दूसरे को स्पर्श करते हुए ऊपर रखें। (4) आकाश को नमस्कार करने की स्थिति होगी। दोनों हाथों की कोहनियों को सीधा रखें।  (5) धीरे-धीरे सांस लें। लगभग दस सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें।  (6) फिर दूसरे पैर पर भी यही क्रिया करें। यह क्रिया दिन में चार से छह बार की जा सकती है।   लाभ (1) यह आसन शरीर के हर जोड़ को उचित व्यायाम देता है।  (2) यह आसन पैर, कोहनी आदि की नसों में रक्त की उचित मात्रा को जमा करता है।  (3) यह आसन भुजाओं और पैरों को लचीला बनाता है और छाती को सुडौल बनाता है।  (4) इस आसन से शरीर का संतुलन बढ़ता है।   (5) यह आसन भावनाओं के प्रशिक्...

भुजंगासन-(bhujangasana)

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      संस्कृत में, सांप को भुजंग कहा जाता है। इस आसन में, उभरा हुआ सिर और निचला धड़ सांप जैसा फड़फड़ा प्रतीत होते हैं। इसलिए इसे 'भुजं  गासन ' कहा जाता है। तरीका   (1) मुँह नीचे करके लेटना।  (2) शरीर की सभी मांसपेशियों को आराम दें।  (3) हथेलियों को कंधों और कोहनियों के बीच जमीन पर रखें।   (4) शरीर के अग्र भाग को धीरे-धीरे नाभि से पंजे तक साँप के नुकीले सिर की तरह उठाएँ। रीढ़ को पीछे मुङो  । . (5) पैर के पंजों को जमीन से स्पर्श करते हुए पीछे खींचे रखें। ऐसा करने से पीठ और कंधों के बीच की मांसपेशियां अच्छी तरह से खिंची रहेंगी। पेट के दबाव में भी मामूली वृद्धि होगी। (6) छह से आठ सेकंड तक अपनी सांस रोककर रखें।  (7) फिर सांस छोड़ें और सिर को वापस अपनी मूल स्थिति में लाएं।  (8) पहले सोते समय दाढ़ी को छाती से दबाकर रखें।   (9) जब तक आप अपना सिर ऊँचा रखते हैं तब तक अपनी सांस रोककर रखें।   (10) फिर धीरे-धीरे साँस छोड़ें। इस आसन को चार से छह बार किया जा सकता है।            ...

भारत के प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले

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        सावित्रीबाई का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगाव में 3 जनवरी 1831 में हुआ था। आप लक्ष्मी और खांडोजी  नेवेश पाटिल के सबसे बडी पुत्री थे। आपके माता पिता माली समुदाय के थे। आपकी शादी  ज्योतिराव फुले के साथ हुई थी।  फुले परिवार निः संतान थे  मगर ब्राह्मण विधवा  के पुत्र को आप ने गोद लिया था।        सावित्रीबाई फुले भारत के प्रथम महिला शिक्षक माने जाते हैं।  उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर स्त्री अधिकार और स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। फुले दंपति 1848 में पुणे के भीडवाडा में प्रथम कन्या शाला की स्थापना की उसने जाति और लिंग के आधार पर लोगों के  साथ जो अन्याय और भेदभाव होता था उसे समाप्त करने का कार्य किया। आज की नई पीढ़ी मेरे ख्याल से लगभग सावित्रीबाई फूले के नाम को जानते भी नहीं होगे मगर हम कह सकते हैं की  सावित्रीबाई फुले एक समाज सुधारक और शिक्षाविद  भी थे। महाराष्ट्र में समाज सुधार आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण और समाज सेवा से  आज भी सावित्रीबाई...