क्षमा ही धर्म
संस्कृत में कहा गया है कि क्षमा वीरस्य भूषणम् मतलब क्षमा वीर पुरुष का आभूषण है ,अलंकार है ,क्षमा उत्तम गुण हैं ,क्षमा जीवन की पूंजी है और क्षमा के आधार पर समाज की सामुदायिक भावना की वृद्धि होती है । हमारे समाज में कई प्रकार के लोग दयावान शीलवान और क्षमा शील होते हैं। क्षमा देने से मन साफ हो जाता है।दूसरों को क्षमा देना बहुत ही कठिन कार्य है। क्षमा देना कहने में अच्छा लगता है किंतु जीवन में उसका स्वीकार करना कठिन है। मगर जीवन में एक बार यह कठिन कार्य स्वीकार कर दिया जाए तो जिंदगी की जंग हम जीत सकते हैं। अगर ईश्वर की कृपा हो तो ही क्षमा का वरदान हमें मिलता है तो क्षमा के रास्ते में चारो ओर हरियाली ही हरियाली है जो मनुष्य दूसरों को क्षमा करता है उस पर हमेशा भगवान के आशीर्वाद बरसते हैं। गुजराती में कहा गया है कि धरती और मिट्टी को चाहे कितनी ही बार खोदो फिर भी वह कुछ भी नहीं कहती ,पेड़ पौधों को चाहे जंगल को काट दो फिर भी वह फरियाद नहीं करते , संत पुरुष भी हम्मेशा मन वचन और कर्म से महान होते हैं वह कितने...