क्षमा ही धर्म

    संस्कृत में कहा गया है कि क्षमा वीरस्य भूषणम् मतलब क्षमा वीर पुरुष का आभूषण है ,अलंकार है ,क्षमा उत्तम गुण हैं ,क्षमा जीवन की पूंजी है और क्षमा के आधार पर समाज की सामुदायिक भावना की वृद्धि होती है । हमारे समाज में कई प्रकार के लोग दयावान  शीलवान और क्षमा शील  होते हैं। क्षमा देने से मन साफ हो जाता है।दूसरों को क्षमा देना बहुत ही कठिन कार्य है। क्षमा देना कहने में अच्छा लगता है किंतु जीवन में उसका स्वीकार करना कठिन है। मगर जीवन में एक बार यह कठिन कार्य स्वीकार कर दिया जाए तो जिंदगी की जंग हम जीत सकते हैं। अगर ईश्वर की कृपा हो तो ही क्षमा का वरदान हमें मिलता है तो क्षमा के रास्ते में चारो ओर हरियाली ही हरियाली है

    जो मनुष्य दूसरों को  क्षमा  करता है उस पर हमेशा भगवान के आशीर्वाद बरसते हैं।

     गुजराती में कहा गया है कि धरती और मिट्टी को चाहे कितनी ही बार खोदो फिर भी वह कुछ भी नहीं कहती ,पेड़ पौधों को चाहे जंगल को काट दो फिर भी वह फरियाद नहीं करते , संत पुरुष भी हम्मेशा मन वचन और कर्म से महान होते हैं वह कितने ही अपमान और कड़वे वचन सह लेते हैं इसलिए वह ईश्वर की तरह पूजनीय और महान होते हैं। नाताल का संदेश हमें यही बात बताता है और उसमें भगवान इशु ने कहा है कि हे ईश्वर तुम यह लोगों को माफ कर दो यह लोग क्या कर रहे हैं उसे उसका पता नहीं है तु इसका कल्याण कर यह संदेश क्षमा के साथ जुड़ा है। दुनिया के सभी धर्मों में क्षमा को ही प्रथम स्थान दिया गया है। क्षमा  टूटते हुए मन को ठीक करने का काम करती। शास्त्र में पाँच प्रकार की क्षमा का उल्लेख है। 
1 आभार क्षमा 
2 अपराध क्षमा 
3 विपाक क्षमा 
4 वचन क्षमा 
5 धर्म क्षमा 


    जीवन में प्रेरणात्मक और आदर्श शुभ कर्म जो कोई होता है तो वह है क्षमा। जैन धर्म में क्षमा याचना को मिच्छामी दुक्कड़म कहा जाता है। हमारे समाज में मीराबाई नरसी मेहता और संत रोहिदास आदि कई संतों ने दुख पीड़ा और तिरस्कार सहकर भी लोगों को समाज को क्षमा दी थी और वह इतिहास में अमर हो गये।
    महावीर  स्वामी  के जीवन से जान सकते हैं कि हमें अपनी जान लेने के लिए हमला करने वाले को दंडित करने के लिए जो साहस दिखाते हैं,  उससे ज्यादा उन्हें  माफ करने में ज्यादा साहस होना चाहिए।
    जब हम किसी पर गुस्सा करते हैं और उस गुस्से को अपने दिमाग में रखते हैं, तो हम वास्तव में उस व्यक्ति को नहीं बल्कि खुद को दंडित करते हैं।  हमारा गुस्सा उस व्यक्ति को चोट नहीं पहुंचाता है लेकिन यह हमें दिन-रात परेशान करता है।  यह गुस्सा हमारे मन और शरीर को भी नुकसान करता है।

    हमें भी हमारे जीवन में और हमारे व्यक्तित्व में ऐसे ही गुण का चयन करके हमारा व्यक्तित्व बनाना चाहिए। क्षमा देने से हमारा मन हल्का हो जाता है और सामने वाले व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन आता है और वह बुराई को छोड़कर अच्छाई पसंद कर लेता है।  गांधी जी ने भी कहा है कि अगर आपको कोई एक गाल पर थप्पड़ मारता है तो दूसरा गाल भी रखो क्योंकि उससे दुश्मनी खत्म हो जाती  हैं ।क्षमा का व्यवहार विचारशील और समझदार व्यक्ति के साथ करना चाहिए। अंत में हम कह सकते हैं कि क्षमा ही समाज का अस्तित्व है समस्त मानव जीवन में उत्तम आदर्श क्षमा ही है और क्षमा ही धर्म है क्षमा ही धर्म है।


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