पागल कौन ? (pagal kaun ?)

    स्कुल मे अपनी क्लास मे गया | में 8 वी कक्षा का क्लास टीचर था | जैसे ही में क्लास के अंदर प्रवेश किया की  सारे छात्र  खड़े हो गए | छात्रों के लिए पहला दिन था | कुछ गभराए हुऐ तो कुछ उत्सुक लग रहे थे | क्लास मे शांति हो गई थी | मैंने बैठने को कहा | सब बैठ गए , करीब 56 छात्र थे | मैंने सब की आँखो  में देखा | कुछ मेरे सामने मुस्कुरा रहे थे  तो कुछ डर या शर्म के कारण  नीचे देखने लगे |


    कोई भी कुछ नहीं बोलते थे | मैंने एक एक करके सबके नाम पूछे | एक लड़की के आलावा सबने  खड़े होकर अपने अपने  नाम बताया | कुछ छात्रों का उत्साह देखकर में भी गभरा गया की में उसके लिए कुछ न कर पाया तो ! मैने भी अपना परिचय दिया | ऐसे में मेरी नजर एक लड़की की और  पड़ी | अकेली बैठी थी | किसी के साथ कुछ भी नहीं बोल रही थी |

    दूसरे दिन में क्लास में गया , फिर वही सब खड़े हुए | मैंने बैठने को कहा | मैंने उस लड़की का दुबारा नाम पूछा |  लेकिन कुछ भी उत्तर नहीं मिला | उसके पास में बैठी एक लड़की ने उसका नाम मनीषा बताया | वो तो  मेरे सामने आँखे फाड़ फाड् कर देख रही थी |

    जैसे जैसे दिन बीतते गए , वैसे वैसे सारे  छात्रों के साथ मेरे आत्मीय सबंध स्थापित हो गया | एक मनीषा के आलावा | में उसको हँसाने के लिए क्लास में जोक्स और कहानियाँ भी सुनाई लेकिन सब बेकार | आखिर में क्या करू ? मैंने तरह तरह की तरकीब अजमायी लेकिन कुछ फर्क न पड़ा | 


    एक दिन मैंने उसको ऑफिस में  बुलाया | उसको कई सवाल पूछे लेकिन उसने जवाब न दिया | दूसरे शिक्षक भी उसकी शिकायत कर रहे थे | मेरे क्लास में थी मुझे उसके बारे में सब पता था | उसकी साथ रहनेवाली लड़किया कह रही थी की सर  वह पागल जैसी है | पहले से ही हमारे साथ पढ़ रही है , लेकिन ऐसा ही करती है |

    कुछ दिन बाद मैंने उसके मम्मी -पपा को बुलाया | उसने भी बताया की सा 'ब वह बचपन से ही ऐसी है | उसको कुछ नहीं आता | सबके साथ झगड़ती रहती है | पागल जैसी हरकत करती है , हम क्या करे कुछ नहीं पता ? उसके ममी पपा चले गए | क्लास में  झगड़ने की बात सुनी थी | मनीषा झगड़ते समय कुछ बोलती नहीं थी , लेकिन सामने वाले को चुटकी काट लेती थी | एक दो महीना ऐसा ही चला | में कुछ न कुछ करता रहता लेकिन कोई प्रत्युत्तर नहीं मिल रहा था |

    अब तो स्कुल के छात्र भी  उसको पागल पागल  कह कर चिड़ा रहे थे | कोई भी लड़की उसके  साथ नहीं रहना चाहती थी | मनीषा पागल जैसी थी लेकिन पागल नहीं थी | उसके साथ किसीने भी अच्छा  व्यवहार नहीं किया | क्लास हो या घर हो |

    मैंने एक दिन क्लास के होशियार छात्रों को बुलाया और मैंने उसको समजाया की में क्लास में कुछ सरल प्रश्नो  पूछूंगा तो आप उसके गलत उत्तर देंगे | सब छात्रों को समझाने के बाद में क्लास में गया | मैंने दो तीन प्रश्न के उत्तर बोर्ड पर लिखा और उन  प्रश्न के  उत्तर पूछने लगा ,मैंने बताया था उसी प्रकार सभी छात्रोंने गलत उत्तर दिया |  फिर में कहने लगा की हमारे क्लास में किसी को भी उत्तर नहीं पता , बड़ी दुःख की बात है | ऐसे में कभी नहीं सुनी हुई आवाज क्लास में सुनाई दी | क्लास में सन्नाटा सा गया | में अनजान बनकर फिर से पूछा कोन बोला ?  मनीषा कुछ न बोली ले किन उसके पास बेठनेवाली लड़की बोली सर यह उत्तर मनीषा ने दिया है | क्लास में तालियां बजने लगी | मनीषा मेरे सामने देखने लगी , उसकी आँख में आंसू थे |


    अगले दिन मेरे सामने आयी तो वह मुस्कुराई | हर क्लास में उत्तर देने लगी | क्लास की मॉनीटर भी बनाई | तीन साल तक पढ़ी , १० वी पास भी हो गयी |

    हमारे घर ,महोल्ला और स्कुल में भी ऐसे मनीषा जैसे बच्चे होते होंगे | हमें उसे चिढ़ाने के बदले उसे प्यार से समजना चाहिए |

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

धारणा योग के प्रकार

भारत में योग विद्यालय कहा है?Where is the yoga school in India?

गुरु की महिमा - Guru Purnima